Saturday, January 7, 2012

JUGNU


पूनम की रात, चाँद ,उसकी कीमत ..कोई मुझसे पूछे

मैं अमावस का जलता हुआ एक आवारा जुगनू हूँ |

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ढूंढते रहते हो तुम.. ज़िन्दगी को; महताब में, सितारों में

क्या लगता है... खुदा ने जुगनू को यूं ही बनाया है |

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मेरा दिल तो जुगनू है ,जिस रात भी तेरे दर पे ठहरेगा

वो ..अमावस की रात क्यों हो ,क़यामत हो जायेगी |

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कौन कहता है मुहब्बत में गज़ब की कशिश नहीं

कौन कहता है मुहब्बत गज़ब की आतिश नहीं

मैं तो अब तक जल रहा हूँ इस आग में ,गौर से देख

यूं ही लोग नहीं पुकारा करते मुझे जुगनू के नाम से |

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बे फजूल में चाहती है चाँद सितारों को, बहुत दूर हैं वो

कभी पा सकेगी, यह चाहत, चाहत ही रह जायेगी |

जो तुम्हारे गुलशन में फिरता रहता है टिमटिमाता हुआ

कभी उस जुगनू को देख छुप के मुलाकातें दो चार करो |

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सदा की आवाज़ बन के सही, वादा है तुझ तक पहुंचूंगा ज़रूर

कहते हैं जुगनू की चमक ए फ़िक्र दूर से दिख जाया करती है |

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कर लो मुझे इकठ्ठा अपनी मुट्ठी में देर तलक

जुगनू हूँ मैं चराग का सा असर छोड़ जाऊँगा |

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